सावधानी और अवसर में तालमेल बिठाना : वाणिज्यिक बैंकिंग में एफडीआई पर आरबीआई का नया रुख
पिछले कुछ वर्षों में आरबीआई ने वाणिज्यिक बैंकिंग में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर सतर्क रुख से हटकर व्यावहारिक, मामला-दर-मामला उदारीकरण वाला रुख अपनाया है, जिससे ज़्यादा विदेशी हिस्सेदारी की अनु...
-
Sunil Mani
25 नवंबर, 2025
- दृष्टिकोण
शिक्षकों का विकास और स्कूल का प्रदर्शन- अच्छा प्रदर्शन करने वाले स्कूलों से सात सबक
स्कूली शिक्षण प्रक्रिया में शिक्षकों की केन्द्रीय भूमिका का महत्त्व सब जानते हैं, फिर भी गुणवत्तापूर्ण परिणामों की राह में ज़मीनी स्तर पर चुनौतियाँ आती हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के स्कूलों में हुए...
-
Amarjeet Sinha
21 नवंबर, 2025
- फ़ील्ड् नोट
क्या न्यायाधीश अपने जैसे प्रतिवादियों का पक्ष लेते हैं? भारतीय न्यायालयों से साक्ष्य
दुनिया भर में होने वाले शोध अध्ययनों से पता चला है कि सत्ता में विभिन्न पदों पर बैठे लोग उन लोगों को प्राथमिकता देते हैं जिनकी सामाजिक पहचान उनसे मिलती-जुलती होती है। यह जानने के लिए कि क्या भारतीय न्...
-
Elliot Ash
Samuel Asher
Aditi Bhowmick
Sandeep Bhupatiraju
Christoph Goessmann
Daniel Li Chen
Paul Novosad
13 नवंबर, 2025
- लेख
कृषि कानून: प्रथम सिद्धांत और कृषि बाजार विनियमन की राजनीतिक अर्थव्यवस्था
कृषि क़ानूनों के इस संगोष्ठी का समापन करते हुए मेखला कृष्णमूर्ति और शौमित्रो चटर्जी इस आलेख में यह तर्क देते हैं कि विनियामक सुधार, अनिवार्य नीतिगत डिजाइन और कार्यान्वयन के लिए एक अधिक व्यापक और प्रासं...
-
Shoumitro Chatterjee
Mekhala Krishnamurthy
03 नवंबर, 2020
- दृष्टिकोण
कृषि कानून: सकारात्मक परिणामों के लिए क्षमतावान
सिराज हुसैन का तर्क है कि यद्यपि कृषि कानून भारतीय कृषि के लिए मध्यम-से-लंबी अवधि में लाभकारी हो सकते हैं परंतु यदि उन्हें पारित कराने के लिए संसदीय प्रक्रियाओं का पालन किए जाता और आम सहमति बनाने के ...
-
Siraj Hussain
02 नवंबर, 2020
- दृष्टिकोण
कृषि कानून: कायापलट करने वाले बदलाव लाने की संभावना कम है
इस पोस्ट में संजय कौल ने कृषि कानून से सभी हितधारकों (किसानों, व्यवसायियों, कमीशन एजेंटों, और सरकार) को होने वाले लाभों और कमियों पर चर्चा की है। इसमें शामिल गतिशीलता को देखते हुए उन्होने यह निष्कर्ष ...
-
Sanjay Kaul
29 अक्टूबर, 2020
- लेख
कृषि कानून: वांछनीय होने के लिए डिजाइन में बहुत कुछ छूट गया है
सुखपाल सिंह कृषि विपणन के मौजूदा तंत्र के मद्देनजर कृषि कानून के संभावित निहितार्थों की जांच करते हैं और इसकी डिजाइन में कुछ खामियों को उजागर करते हैं। ...
-
Sukhpal Singh
26 अक्टूबर, 2020
- दृष्टिकोण
कृषि कानून: कृषि विपणन का उदारीकरण आवश्यक है
कृषि कानून पर अपना दृष्टिकोण प्रदान करते हुए भरत रामास्वामी ने यह कहा है कि कृषि विपणन का उदारीकरण एक आवश्यक कदम है – पूर्व में सभी राजनीतिक विचारधाराओं द्वारा इसका समर्थन किया गया। इसमें बदलाव करना य...
-
Bharat Ramaswami
23 अक्टूबर, 2020
- दृष्टिकोण
ई-संगोष्ठी का परिचय: नए कृषि कानून को समझना
क्या कृषि कानून किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेंगे? क्या किसानों को बाजारों तक विस्तारित पहुंच से लाभ मिल सकता है? क्या वे कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के कानून के कारण शहरी फर्मों के साथ अनुबंध स्थापित करने...
-
Ashok Kotwal
21 अक्टूबर, 2020
- विचार-गोष्ठी
ड्यूएट: सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ सावधानीपूर्वक कार्यान्वयन
शहरी रोजगार कार्यक्रम हेतु ज्यां द्रेज़ के ड्यूएट प्रस्ताव पर टिप्पणी करते हुए संदीप सुखटणकर यह विमर्श करते हैं कि संभावित आश्वासन और साथ ही इससे जुड़े स्वाभाविक मुद्दों (जिनका समाधान किया जाना है)...
-
Sandip Sukhtankar
19 अक्टूबर, 2020
- दृष्टिकोण
ग्रामीण भारत में स्कूल का चयन: धारणा बनाम वास्तविकता
कम शुल्क वाले निजी स्कूलों की संख्या मे वृद्धि होने के साथ भारत में स्कूलों के विकल्पों में काफी वृद्धि हुई है और इसे स्कूली शिक्षा के लिए बाजार-आधारित दृष्टिकोण के अंतर्गत महत्वपूर्ण माना जाता है। ग्...
-
Rahul Lahoti
Rahul Mukhopadhyay
15 अक्टूबर, 2020
- लेख
ड्यूएट: लागत और लाभों की तुलना
ज्यां द्रेज़ के ड्यूएट प्रस्ताव पर अपने विचार रखते हुए फर्ज़ाना आफ्रीदी यह तर्क देती हैं कि हमें सामान्य समतुल्यता कार्य संरचना के अंदर सरल आय आश्वासन योजना की बजाय, संभवत: प्रशासनिक रूप से जटिल शह...
-
Farzana Afridi
13 अक्टूबर, 2020
- दृष्टिकोण
कोविड-19: ‘आभासी महामारी’ और महिलाओं के खिलाफ हिंसा
महिलाओं के खिलाफ हिंसा दुनिया भर में एक समस्या है जिसकी आर्थिक लागतें वैश्विक जीडीपी में 1% से 4% तक आती हैं। यह लेख इस बात की जांच करता है कि भारत में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान महिलाओं के खिलाफ हिंसा...
-
Saravana Ravindran
Manisha Shah
08 अक्टूबर, 2020
- लेख
एक साथ कराए जाने वाले चुनाव, मतदाता का व्यवहार तथा चुनावी नतीजे
भारत सरकार का एक क्रियाशील नीतिगत प्रस्ताव है कि सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव और राष्ट्रीय चुनाव एक साथ ही कराए जाएँ। यह लेख इस बात की जाँच करता है कि क्या राष्ट्रीय एवं राज्य के चुनाव एक साथ होने से...
-
Vimal Balasubramaniam
Sabyasachi Das
Apurav Yash Bhatiya
06 अक्टूबर, 2020
- लेख
ड्यूएट: दूसरे देशों के अनुभवों से सीखना
ज्यां द्रेज़ के ड्यूएट प्रस्ताव पर टिप्पणी करते हुए मार्टिन रेवेलियन यह सुझाव देते हैं कि इसमें तीन चरणों की आवश्यकता है: समान नीतियों वाले दूसरे देशों के अनुभवों से सीखना, वृद्धि पर विचार करने से पहले...
-
Martin Ravallion
01 अक्टूबर, 2020
- दृष्टिकोण




05 दिसंबर, 2025