Tag Search: “राजनीतिक अर्थव्यवस्था”
कृषि कानून: वांछनीय होने के लिए डिजाइन में बहुत कुछ छूट गया है
सुखपाल सिंह कृषि विपणन के मौजूदा तंत्र के मद्देनजर कृषि कानून के संभावित निहितार्थों की जांच करते हैं और इसकी डिजाइन में कुछ खामियों को उजागर करते हैं। ...
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Sukhpal Singh
26 अक्टूबर, 2020
- दृष्टिकोण
कृषि कानून: कृषि विपणन का उदारीकरण आवश्यक है
कृषि कानून पर अपना दृष्टिकोण प्रदान करते हुए भरत रामास्वामी ने यह कहा है कि कृषि विपणन का उदारीकरण एक आवश्यक कदम है – पूर्व में सभी राजनीतिक विचारधाराओं द्वारा इसका समर्थन किया गया। इसमें बदलाव करना य...
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Bharat Ramaswami
23 अक्टूबर, 2020
- दृष्टिकोण
ई-संगोष्ठी का परिचय: नए कृषि कानून को समझना
क्या कृषि कानून किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेंगे? क्या किसानों को बाजारों तक विस्तारित पहुंच से लाभ मिल सकता है? क्या वे कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के कानून के कारण शहरी फर्मों के साथ अनुबंध स्थापित करने...
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Ashok Kotwal
21 अक्टूबर, 2020
- विचार-गोष्ठी
ड्यूएट: दूसरे देशों के अनुभवों से सीखना
ज्यां द्रेज़ के ड्यूएट प्रस्ताव पर टिप्पणी करते हुए मार्टिन रेवेलियन यह सुझाव देते हैं कि इसमें तीन चरणों की आवश्यकता है: समान नीतियों वाले दूसरे देशों के अनुभवों से सीखना, वृद्धि पर विचार करने से पहले...
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Martin Ravallion
01 अक्टूबर, 2020
- दृष्टिकोण
क्या राजनीतिक आरक्षण कारगर है? यदि हाँ तो किसके लिए?
क्या राजनीतिक आरक्षण विकास को कमजोर करता है या उसे बढ़ावा देता है, तो किसके लिए? यह लेख भारत के 'अनुसूचित क्षेत्रों' का विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जहाँ ऐतिहासिक रूप से वंचित अनुसूचित जनजातियों के लिए ...
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Saad Gulzar
Nicholas Haas
Ben Pasquale
18 अगस्त, 2020
- लेख
कोविड-19: बिहार लौटते प्रवासी मजदूर, ग्रामीण आजीविका तथा सामाजिक सुरक्षा
कोविड-19 के प्रसार को कम करने के लिए लागू किए गए लॉकडाउन के कारण अनेक प्रवासी मजदूरों ने अपना रोज़गार गँवाया और उनमें से करीब 30 लाख से ज्यादा प्रवासी दूसरे राज्यों से बिहार लौटे। इस विषय पर प्रोफेस...
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Farzana Afridi
Arvind Kumar Chaudhary
06 अगस्त, 2020
- पॉडकास्ट
सेवानिवृत्ति के बाद की नियुक्तियों की राजनीति: सर्वोच्च न्याेयालय में भ्रष्टाचार?
भारतीय न्यायपालिका न्यायिक स्वतंत्रता की रक्षा करती है। कार्यकारी हस्तक्षेप से सावधान रहते हुए न्यायाधीश अपने संस्थागत हितों को बचाते हैं। लेकिन क्या भारत की न्यायिक व्यवस्था न्यायिक स्वतंत्रता के उल्...
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Madhav Aney
Shubhankar Dam
Giovanni Ko
14 जुलाई, 2020
- लेख
भारत एक क्रियाशील सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के निर्माण के लिए दुनिया का नेतृत्व कैसे कर सकता है
इबोला वायरस रोग से सबक के बावजूद, दुनिया ने अभी तक भरोसेमंद, समुदाय से जुड़े हुए लोक-स्वास्थ्यकर्मियों के संवर्ग में निवेश नहीं किया है जो अपने कार्यों को पेशेवरों के रूप में करने में सशक्त होते हैं। ...
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Stuti Khemani
30 जून, 2020
- लेख
कोविड-19: दुनिया को नए विचारों की जरुरत है
मजदूर, कारीगर, छोटे किसान और अन्य साधनहीन लोग पहले की तुलना में आज अधिक अपमानजनक जिंदगी जीने के लिए मजबूर हैं। कोविड-19, एक महामारी, जिसने समस्त दुनिया को सोचने पर मजबूर कर दिया है। इस लेख में प्रेमकु...
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Premkumar Mani
19 मई, 2020
- दृष्टिकोण
आरसीईपी व्यापार समझौता – मौका छोड़ दिया गया?
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है कि भारत दक्षिण पूर्व एशियाई देशों और इसके मुक्त-व्यापार भागीदारों के बीच क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (रीजनल कोंप्रिहेंसिव इकनॉमिक पार्टनर्शिप -...
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Sarthak Agrawal
Madhav Malhotra
13 दिसंबर, 2019
- दृष्टिकोण
क्या भारतीय मतदाताओं को अपने प्रतिनिधियों के कार्यालय में रहते हुए उनकी संपत्ति में वृद्धि होता देख फर्क पड़ता है?
राजनेताओं के लिए वित्तीय सूचनाओं की जानकारी देने की आवश्यकता के तहत अपनी परिसंपत्तियों की घोषणाएं करना पूरी दुनिया में आम बात होती जा रही है। भारत में वित्तीय घोषणाएं राजनीतिक पद के लिए उम्मीदवारी की ...
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Simon Chauchard
S.P. Harish
Marko Klašnja
18 सितंबर, 2019
- लेख
अपनों को मताधिकार? मतदान अधिकारी की पहचान और चुनाव परिणाम
स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव का प्रावधान ऐसी लोक सेवा है जो निर्वाचित प्रतिनिधियों को जवाबदेह और प्रतिक्रियाशील बनाए रखने के लिहाज से बहुत ज़रूरी है। इस आलेख में मतदान केंद्रों के प्रशासन की छानबीन की ग...
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Yusuf Neggers
02 मई, 2019
- लेख



